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भारतीय रेलवे की वित्तीय रीढ़ मानी जाने वाली इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन (आईआरएफसी) ने चालू वित्त वर्ष के लिए बड़ा विस्तार योजना तैयार की है। कंपनी अब लगभग 2 अरब डॉलर का विदेशी ऋण जुटाने जा रही है, जिसका इस्तेमाल रेलवे और उससे जुड़ी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के वित्तपोषण में किया जाएगा। सरकारी स्वामित्व वाली इस कंपनी की यह रणनीति ऐसे समय में सामने आई है जब देश में रेलवे, माल परिवहन, लॉजिस्टिक्स और सार्वजनिक ढांचा परियोजनाओं में बड़े निवेश की तैयारी चल रही है। कंपनी का मानना है कि आने वाले वर्षों में उच्च गुणवत्ता वाली परियोजनाओं की मजबूत मांग बनी रहेगी और यही वजह है कि उसने अपने कर्ज वितरण और संसाधन जुटाने के लक्ष्य को काफी आक्रामक रखा है।
विदेशी ऋण के जरिए विकास को गति देने की तैयारी
आईआरएफसी मुख्य रूप से जापानी मुद्रा येन में बाह्य वाणिज्यिक उधार यानी विदेशी ऋण जुटाएगी। यह राशि कंपनी के बोर्ड द्वारा मंजूर 70,000 करोड़ रुपये की संसाधन जुटाने की योजना का हिस्सा है। कंपनी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक मनोज कुमार दुबे के अनुसार, आईआरएफसी ने बैंकों के एक समूह के साथ 1.1 अरब डॉलर के बराबर जापानी येन ऋण के लिए समझौता भी कर लिया है। यह ऋण पांच साल की अवधि के लिए लिया जा रहा है और इसकी ब्याज दर टोक्यो ओवरनाइट औसत दर से जुड़ी होगी। कंपनी को उम्मीद है कि जून तिमाही के भीतर इस ऋण की पहली किस्त जारी हो जाएगी। इससे रेलवे क्षेत्र से जुड़ी कई परियोजनाओं को तेज गति से वित्तीय सहायता मिल सकेगी।
रेलवे और ढांचा परियोजनाओं पर रहेगा फोकस
आईआरएफसी ने साफ किया है कि विदेशी ऋण से जुटाई गई राशि का उपयोग रेलवे से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी परियोजनाओं के लिए किया जाएगा। इसमें रेलवे नेटवर्क विस्तार, माल ढुलाई, स्टेशन विकास, लॉजिस्टिक्स और अन्य सहायक ढांचा परियोजनाएं शामिल हो सकती हैं। कंपनी अब केवल रेलवे फाइनेंसिंग तक सीमित नहीं रहना चाहती। पिछले कुछ वर्षों में उसने विविधीकरण की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं। यही वजह है कि अब वह विभिन्न बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में भी अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत में बुनियादी ढांचा क्षेत्र आने वाले वर्षों में सबसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों में रहेगा और आईआरएफसी इस अवसर का पूरा फायदा उठाना चाहती है।
वित्त वर्ष 2027 के लिए बड़े लक्ष्य तय
आईआरएफसी ने चालू वित्त वर्ष के लिए काफी महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। कंपनी का उद्देश्य 1 लाख करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत करना और करीब 40,000 करोड़ रुपये का वितरण करना है। पिछले वित्त वर्ष में भी कंपनी ने मजबूत प्रदर्शन किया था। वित्त वर्ष 2026 के दौरान आईआरएफसी ने लगभग 72,949 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी और करीब 35,067 करोड़ रुपये का वितरण किया। यह कंपनी के वार्षिक अनुमान से भी अधिक था। यह आंकड़े दिखाते हैं कि रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में पूंजी की मांग लगातार बढ़ रही है और आईआरएफसी इस मांग को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रही है।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची कंपनी की संपत्ति और कारोबार
आईआरएफसी का वित्तीय आधार भी लगातार मजबूत हो रहा है। कंपनी की कुल संपत्ति बढ़कर 56,748 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। वहीं, प्रबंधन के तहत कुल परिसंपत्ति यानी एसेट अंडर मैनेजमेंट 4.85 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गई है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि कंपनी ने अपना शून्य फंसे कर्ज यानी शून्य एनपीए का रिकॉर्ड बरकरार रखा है। आमतौर पर बड़े पैमाने पर ऋण देने वाली कंपनियों में खराब कर्ज की समस्या देखने को मिलती है, लेकिन आईआरएफसी ने अब तक अपने कर्ज पोर्टफोलियो को काफी संतुलित रखा है। कंपनी का कहना है कि विविधीकरण की रणनीति से उसकी आय क्षमता मजबूत हुई है और इससे मार्जिन में लगातार सुधार देखने को मिला है।
लाभ, मार्जिन और निवेशकों के लिए संकेत
वित्त वर्ष 2026 में आईआरएफसी ने अब तक का सबसे अधिक लाभ दर्ज किया। कंपनी का शुद्ध लाभ बढ़कर 7,009 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 6,502 करोड़ रुपये था। यानी कंपनी ने सालाना आधार पर लगभग 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इसके अलावा कंपनी का शुद्ध ब्याज मार्जिन भी लगातार बेहतर हुआ है। वित्त वर्ष 2026 में यह 1.5 प्रतिशत रहा, जिसे कंपनी चालू वित्त वर्ष में बढ़ाकर 1.65 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रख रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, ब्याज मार्जिन में सुधार और शून्य एनपीए की स्थिति आईआरएफसी को अन्य सरकारी वित्तीय कंपनियों की तुलना में मजबूत बनाती है। यही कारण है कि लंबे समय के निवेशक इस कंपनी को रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की मजबूत कहानी के रूप में देख रहे हैं।
नवरत्न दर्जा मिलने के बाद तेज हुआ विस्तार
पिछले वर्ष आईआरएफसी को नवरत्न का दर्जा मिला था। इस दर्जे के बाद कंपनी को निवेश, साझेदारी और वित्तीय फैसलों में अधिक स्वतंत्रता मिली है। अब कंपनी घरेलू और विदेशी बाजारों से आसानी से पूंजी जुटा सकती है। यही वजह है कि वह अंतरराष्ट्रीय बाजार से सस्ते विदेशी ऋण जुटाकर अपनी फंडिंग लागत कम करने की रणनीति पर काम कर रही है। जापानी येन में ऋण जुटाने का फैसला भी इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है, क्योंकि जापान में ब्याज दरें अपेक्षाकृत कम हैं। इससे कंपनी को कम लागत पर बड़ी पूंजी उपलब्ध हो सकेगी।
निष्कर्ष: रेलवे विकास की सबसे मजबूत वित्तीय कड़ी बनती आईआरएफसी
आईआरएफसी का 2 अरब डॉलर का विदेशी ऋण जुटाने का फैसला केवल एक सामान्य वित्तीय योजना नहीं है, बल्कि यह भारत के तेजी से बढ़ते रेलवे और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में बड़े विस्तार का संकेत है। कंपनी ने मजबूत लाभ, रिकॉर्ड संपत्ति, बेहतर मार्जिन और शून्य एनपीए के साथ खुद को एक भरोसेमंद सरकारी वित्तीय संस्था के रूप में स्थापित किया है। अब विदेशी बाजार से पूंजी जुटाकर वह अपनी विकास रफ्तार को और तेज करना चाहती है। रेलवे, लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में आने वाले वर्षों में भारी निवेश की संभावना है। ऐसे में आईआरएफसी उन चुनिंदा सरकारी कंपनियों में शामिल होती दिख रही है जो इस विकास यात्रा की सबसे अहम वित्तीय कड़ी बन सकती हैं। निवेशकों के लिए भी यह संकेत है कि कंपनी केवल पारंपरिक रेलवे फाइनेंसिंग तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि दीर्घकालिक विकास की बड़ी कहानी लिखने की तैयारी में है।